किसका नाम जाप करें? जाप के लिए नाम कैसे चुनें ?

किसका नाम जाप करें? जाप के लिए नाम कैसे चुनें ?

किसका नाम जाप करें? जाप के लिए नाम कैसे चुनें ?

नाम जाप एक ऐसा आध्यात्मिक साधन है, जो व्यक्ति को सीधे परमात्मा से जोड़ता है। लेकिन बहुत से भक्त यह सोचते हैं कि “मैं किस भगवान का नाम जाप करूं?” या “कौन सा नाम मेरे लिए श्रेष्ठ है?” — तो आइए जानते हैं इस विषय में संतों और शास्त्रों की दृष्टि से।

1. सभी नाम एक ही परम परमतमा के हैं

हिंदू धर्म में राम, कृष्ण, राधा, शिव, नारायण, विष्णु, दत्तात्रेय, नारायणी आदि अनेकों नाम हैं। परंतु शास्त्रों में कहा गया है:
“एकं सत् विप्रा बहुधा वदंति”
अर्थात — सत्य (परमात्मा) एक ही है, लेकिन ज्ञानीजन उसे अलग-अलग नामों से पुकारते हैं।

इसलिए आप किसी भी नाम का जाप करें — राम, कृष्ण, राधा, नारायण या श्रीहरि — वह अंततः उसी परमसत्ता तक पहुंचाता है।

2. जो नाम प्रिय लगे, वही चुनें

जाप का मूल उद्देश्य है भक्ति और एकाग्रता। जो नाम आपको हृदय से प्रिय लगे,

जिससे मन लग जाए — वही नाम आपके लिए सबसे श्रेष्ठ है।

यदि किसी को “राम” नाम से शांति मिलती है, तो किसी को “राधे” नाम से प्रेम की अनुभूति होती है। यह आपकी आंतरिक भावना और आस्था पर निर्भर करता है।

3. कलियुग में नाम जाप ही मोक्ष का मार्ग है

श्रीमद्भागवत और अन्य ग्रंथों में वर्णन है कि:

“कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिर-सुमिर नर उतरहि पारा”

कलियुग में न तो यज्ञ, न कठिन तपस्या, न ही व्रत — केवल नाम जाप ही ईश्वर की प्राप्ति और मुक्ति का सर्वोत्तम मार्ग है।

4. समस्त पापों का नाश केवल नाम से

नाम जाप केवल भक्ति नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और पापों के प्रायश्चित का भी साधन है।

रामायण में गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा:
“नाम लेत पावन भए पापी तुलसीदास”
अर्थात — जो नाम लेता है, उसके पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

5. ऑनलाइन जाप से बनाएं साधना का निरंतर अभ्यास

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निष्कर्ष

नाम कोई भी हो — राम, कृष्ण, राधा या कोई अन्य, उसका जाप आपको परमात्मा से जोड़ेगा। जो नाम आपको आत्मा से प्रिय लगे, उसी से शुरुआत करें और नियमित जाप करते रहें। कलियुग में यही सबसे सरल और सच्चा मार्ग है।

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